कोई दुःख को भी सुख समझे, कोई सुख में भी रोता है,


कोई दुःख को भी सुख समझे,



कोई सुख में भी रोता है,
आशा और तृष्णा का कभी अंत ना होता है इस भूल भुलैया में।
खड़ा दास तुम्हारा है,
ओ मेरे श्याम बाबा, क्या खेल रचाया है।

कोई छोड़ के माया मोह को,
तेरे चरणों में आता है,
कोई माया के बंधन में,
और ज़्यादा उलझ जाता है।

कोई न समझा तेरी लीला,
सब है मोह का बंधन,
ओ मेरे श्याम बाबा,
तेरा खेल है अति अगाध।

तेरा नाम जो लेते हैं,
वो सुख-शांति को पाते हैं,
पर जो तेरी माया में फंसे,
वो जन्मों तक पछताते हैं।

कोई छोड़ के सबकुछ तेरा,
मन को तुझसे लगाता है,
कोई स्वार्थ में लिप्त होकर,
जीवन यूं ही गवाता है।

तेरे दर पर जो सिर झुकाए,
वो हर दर्द भुला देता है,
ओ मेरे श्याम बाबा,
तेरा प्यार नया जीवन देता है।

तेरी मुरली की मधुर धुन,
जीवन में रंग भर जाती है,
हर भक्त के हृदय में बाबा,
तेरी छवि बस जाती है।

कोई तेरा नाम जपे दिन-रात,
तेरा भजन गुनगुनाता है,
कोई मोह-माया के जाल में,
सपनों में उलझ जाता है।

तेरी कृपा से जो पाया है,
उसका कोई मोल न होगा,
ओ मेरे श्याम बाबा,
तेरे बिना जीवन का कोई तोल न होगा।

जो मन तुझमें रम जाता है,
संसार का भय मिट जाता है,
तेरे चरणों में जो झुकता है,
संसार से पार हो जाता है।

कोई प्रेम में खोया है तेरा,
तेरे संग जीवन बिताता है,
हर घड़ी बस तेरा नाम लिए,
मुक्ति का मार्ग पाता है।

हे श्याम बाबा, तेरा खेल निराला,
तेरा नाम है हर दुख का सहारा।
तूने इस जीवन को सजाया है,
हर एक को राह दिखाया है।

तेरा नाम जो लेता है,
वो सत्य को अपनाता है,
तेरी भक्ति में जो डूब जाए,
वो परम आनंद को पाता है।

कोई सत्य का संग पकड़कर,
तुझ तक पहुँचने आता है,
कोई मोह और तृष्णा में,
अपना समय गंवाता है।

ओ मेरे श्याम बाबा,
तेरी लीला अपरंपार है,
जो समझ ले इस सत्य को,
वो ही सच्चा भक्त है।

तेरी शरण में जो आता है,
संसार का सुख पाता है,
तेरी कृपा से जो नहाए,
वो हर दुःख को भूल जाता है।

कोई दुःख को भी सुख समझे,
कोई सुख में भी रोता है,
आशा और तृष्णा का अंत यही,
तेरे चरणों में होता है।



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