- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
यह रहा "श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन" का पूरा और विस्तृत संस्करण, जिसे तुलसीदास जी ने लिखा है:
श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन, हरण भवभय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणम्।।
कंदर्प अगणित अमित छवि, नवनील नीरद सुंदरम्।
पटपीत मानहु तडित रुचि, शुचि नौमि जनक सुतावरम्।।
भजु दीनबंधु दिनेश दानव, दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंद कंद कोशल, चंद दशरथ नंदनम्।।
सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु, उदारु अंग विभूषणम्।
आजानुभुज शर चापधर, संग्राम जित खरदूषणम्।।
इति वदति तुलसीदास शंकर, शेष मुनि मन रंजनम्।
मम हृदय कंज निवास कुरु, कामादि खल दल गंजनम्।।
श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन, हरण भवभय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणम्।।
यह भजन भगवान श्रीराम के दिव्य स्वरूप, सौंदर्य और उनकी करुणा का वर्णन करता है। इसे गाकर भक्त अपने मन को शांत कर सकते हैं और प्रभु राम की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
"जय श्रीराम!"
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें