तेरी बंसी की धुन भाये मुझे, तेरी बंसी की धुन भाये मुझे,

 तेरी बंसी की धुन भाये मुझे, तेरी बंसी की धुन भाये मुझे,

कान्हा क्यो ना सामने आये, बंसी की धुन ना सुनाये,

 रातो को निंद ना आई मुझे ,रातो को नींद न आये

 तेरी बंसी की धुन भाये मुझे ,कान्हा सामने क्यो ना आये, 

तेरा श्याम रंग भी भाये मुझे, तेरा श्याम रंग भी भाये मुझे

 कान्हा सामने क्यों ना आये तेरा श्याम रंग है भाये,

तेरी बंसी की धुन भाये मुझे, तेरी बंसी की धुन भाये मुझे,

कान्हा क्यो ना सामने आये, बंसी की धुन ना सुनाये,

 रातो को निंद ना आई मुझे ,रातो को नींद न आये

 तेरी बंसी की धुन भाये मुझे ,कान्हा सामने क्यो ना आये, 

तेरा श्याम रंग भी भाये मुझे, तेरा श्याम रंग भी भाये मुझे

 कान्हा सामने क्यों ना आये तेरा श्याम रंग है भाये,

तेरी बंसी की धुन

(1)
तेरी बंसी की धुन भाये मुझे,
तेरी बंसी की धुन भाये मुझे।
कान्हा, क्यों ना सामने आते?
क्यों ना मुझे दर्शन देते?
तेरी बंसी की तान जब छेड़ती,
मन मेरा बावरा हो जाता,
जग सारा भूल मैं जाऊं,
सिर्फ तेरा नाम दोहराऊं।

रातों को नींद ना आये मुझे,
तेरी बंसी की प्यास जगाये मुझे।
दिल ये बेचैन, राहों में तकता,
क्यों ना कान्हा दर्शन देता?

(2)
तेरा श्याम रंग भी भाये मुझे,
तेरा श्याम रंग भी भाये मुझे।
उस रंग में डूब जाने को,
मन मेरा बेचैन हो जाये।
जैसे गहरे सागर में गोते खाऊं,
वैसे ही तेरी छवि में रम जाऊं।
तेरी बंसी की तान सुनकर,
जैसे वृंदावन झूम उठे।
गोपियां तेरी बंसी पे मोहित,
वैसे ही मेरा मन भी तुझसे जुड़ जाये।

(3)
कान्हा, क्यों ना तेरा संग पाऊं,
क्यों ना तेरे चरणों में रम जाऊं।
तेरी मीठी बंसी के सुर,
हर ग़म को मिटा दे दूर।
तेरी बंसी की तान सुनते ही,
जीवन मेरा पूर्ण हो जाये।
तेरी बंसी का संगीत,
जैसे अमृत बरसाता।

(4)
राधा के मन की तरह,
मेरा मन भी तुझमें खो जाये।
तेरे संग की प्यास बढ़े,
तेरी बंसी की धुन से चैन मिले।
ओ कान्हा, दर्शन दो,
मुझे अपने प्रेम में भर लो।
तेरी छवि का दीदार हो,
तेरी मधुर बंसी से प्यार हो।

(5)
तेरे गोवर्धन की छांव मिले,
तेरे वृंदावन में ठांव मिले।
तेरे प्रेम की गहराई में,
मेरा दिल खो जाये।
तेरी बंसी की तान से,
जीवन को संगीत मिल जाये।
सांसों में तेरी यादें बसें,
हर घड़ी तेरा नाम जपे।

(6)
कान्हा, जब से सुनी बंसी की तान,
मेरा मन हो गया दीवाना।
तेरा रंग, तेरा रूप, तेरा नाम,
सब कुछ लग रहा है प्यारा।
तेरी छवि का जादू ऐसा,
कि हर दर्द हो जाये फीका।
तेरी बंसी की धुन सुरीली,
हर पल मुझे अपनी ओर खींचे।

(7)
तेरे वृंदावन का चित्र खिंच जाये,
जहां गोपियां संग रास रचाये।
मोर मुकुट, पीतांबर का शृंगार,
तेरी छवि से मन हो जाये निहार।
तेरे नयन, जैसे गहरे सागर,
जहां मैं हर पल डूबने को तैयार।
तेरी बंसी की मधुर तान,
मुझे बना देती है तेरा गुलाम।

(8)
हे मुरलीधर, तुझसे विनती है,
मुझे अपने चरणों का आश्रय दे।
तेरे बिना जीवन अधूरा है,
तेरे बिना हर खुशी अधूरी है।
तेरी बंसी का जादू,
हर ग़म मिटा दे पलभर में।
तेरा प्रेम, तेरी मूरत,
सब कुछ मेरे लिए अनमोल है।

(9)
राधा के प्रेम का गान सुनाऊं,
तेरे संग रास की छवि बनाऊं।
तेरी बंसी की तान से,
मन मंदिर सजाऊं।
तेरे नाम का कीर्तन करूं,
हर पल तुझे याद करूं।
तेरी कृपा से, कान्हा,
जीवन मेरा सफल हो जाये।




written by @krishnaandkush.



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